Gulzar birthday special best poems and shayari of best hindi poet

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Gulzar birthday special best poems and shayari of best hindi poet
Gulzar birthday special best poems and shayari of best hindi poet

Gulzar birthday special best poems and shayari of best hindi poet:

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है…

किसके लिए लिखी होंगी गुलजार ने ये पंक्तियां? अपनी प्रेयसी राखी के लिए या फिर अपनी शायरी के उन दीवानों के लिए जो उनपे दिलोजान छिड़कते हैं.

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

Who can forget Gulzar, his creations? Omar Khayyam’s rubies are his compositions. Today is the birth date of this unique diamond of Hindi poetry, ghazals and songs. Gulzar saheb has used such wonderful sensations with words in his poetry and songs. How many Lunai are there. More than one emerald, more than one song, what a great ghazal, what a great shayari.

1. वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है

2. तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं

3. जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है

Why does anyone write so well, well? Gulzar, who became a songwriter from mechanic Sampoorn Singh Kalra, rules crores of hearts in today’s date. He was born on 18 August 1934 in a Sikh family of Dina, a small town in Jhelum district in Punjab.

This part is now in Pakistan. Gulzar saheb had a fondness for chero-poetry and music since his school days. During college days, he gave vent to his hobbies. When the partition happened, the family moved to Amritsar, and later Gulzar saheb took refuge in Mumbai.

Gulzar started his cine career in 1961 as an assistant to Vimal Rai. Later he also worked as an assistant to Hrishikesh Mukherjee and Hemant Kumar.

As a lyricist, Gulzar wrote the first song ‘Mora Gora Ang Lei Le’ for Vimal Rai’s film ‘Bandini’ released in the year 1963. What a hit that song was … from that time till today. Whatever he did, made history. In the year 1971, through the film ‘Mere Apne’, he also stepped into the field of direction.

Writer Yatindra Mishra congratulated Gulzar Sahib, writing, “The finest Afsananigar, evergreen lyricist and sensitive filmmaker entering the 85th year of his age, has a great symphony with his songs and ravani. A similar song, music for a hundred years. , The world of poetry and nazam populate. ”

Indeed, on social media page, there is an influx of people congratulating Gulzar saheb. Prashant Dwivedi has expressed his feelings in a few words, “These who are ashaar with honey, their name is Gulzar … On hearing the name of Gulzar Saheb, lips are immersed in a syrup. Asha’ar also fills the sweetness of honey in the particles of sand. He is a poet of a group whose natural love of love can be conveyed to every human being.

“He is excellent in both literature and cinema. Look at the text of his writing – ‘We have seen the fragrance of those eyes, do not touch it with your hands,’ from ‘Dil To Bachcha Hai Ji’.

“His tone of writing every feeling is very soft and velvety, with all its brilliance and humor. There is a certain amount of gobbling on his birth. There is something that, like writing love, gets his pen And that ink becomes ink. Today is just such a blessing that ours and theirs can be long. One more year. Same way from year to year….
And…

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जो लिखने में उनकी उमर गुज़री,
वो पढ़ने में मेरी उमर गुज़रे…”

वाकई गुलज़ार ने हिंदी को, हिंदी सिनेमा को कितना कुछ नवाजा. उन्होंने केवल लिखा भर नहीं, बल्कि’कोशिश’, ‘परिचय’, ‘मेरे अपने’, ‘अचानक’, ‘खूशबू’, ‘आंधी’, ‘मौसम’, ‘किनारा’, ‘मीरा’, ‘किताब’, ‘नमकीन’, ‘अंगूर’, ‘इजाजत’, ‘लिबास’, ‘लेकिन’, ‘माचिस’ और ‘हू तू तू’ जैसी कई फिल्मों के निर्देशन से भी उन्होंने हिंदी सिनेमा को गुलजार किया.

गुलज़ार साहब की प्रमुख प्रकाशित कृतियों में पुखराज, एक बूंद चाँद, चौरस रात, रवि पार, कुछ और नज़्में, यार जुलाहे, त्रिवेणी , छैंया-छैंया, मेरा कुछ सामान शामिल है.

Gulzar developed a new style of poetry, which is called ‘Triveni’. With songs like ‘Give us the power of the mind, donate the mind, conquer the mind’ and ‘Jungle-jungle baat chali jaat hai, chaddhi pahan ke phool khil hai phool khil hai’, he has inspired or revived the children of all ages. Like it is determined. Gulzar’s presence in Bal Geet is enough to convey his versatility.

Gulzar’s ability does not deserve any award, but he has won Filmfare twenty times and National Award five times. In 2010, he has also been awarded the Grammy Award for the song ‘Jai Ho’ of ‘Slumdog Millionaire’.

In view of his contribution to Indian cinema, he was awarded the Padma Bhushan, the third highest civilian honor in the country in 2004, while Gulzar Saheb has also been awarded the Dadasaheb Phalke, the highest honor in the film industry for his outstanding contribution to the world of cinema. Gulzar has also received Sahitya Akademi Award in the year 2002 for his short story collection ‘Dhoom’ in Urdu language.

Today on Gulzar saheb’s birthday, read his five selected works:

1.
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं
कुछ इक पल के
कुछ दो पल के

कुछ परों से हल्के होते हैं
बरसों के तले चलते-चलते
भारी-भरकम हो जाते हैं

कुछ भारी-भरकम बर्फ़ के-से
बरसों के तले गलते-गलते
हलके-फुलके हो जाते हैं

नाम होते हैं रिश्तों के
कुछ रिश्ते नाम के होते हैं
रिश्ता वह अगर मर जाये भी
बस नाम से जीना होता है

बस नाम से जीना होता है
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

2.

माँ उपले थापा करती थी

छोटे थे, माँ उपले थापा करती थी
हम उपलों पर शक्लें गूँथा करते थे
आँख लगाकर – कान बनाकर
नाक सजाकर –
पगड़ी वाला, टोपी वाला
मेरा उपला –
तेरा उपला –
अपने-अपने जाने-पहचाने नामों से
उपले थापा करते थे

हँसता-खेलता सूरज रोज़ सवेरे आकर
गोबर के उपलों पे खेला करता था
रात को आँगन में जब चूल्हा जलता था
हम सारे चूल्हा घेर के बैठे रहते थे
किस उपले की बारी आयी
किसका उपला राख हुआ
वो पंडित था –
इक मुन्ना था –
इक दशरथ था –
बरसों बाद – मैं
श्मशान में बैठा सोच रहा हूँ
आज की रात इस वक्त के जलते चूल्हे में
इक दोस्त का उपला और गया!

3.
एक नदी की बात सुनी…

एक नदी की बात सुनी…
इक शायर से पूछ रही थी
रोज़ किनारे दोनों हाथ पकड़ कर मेरे
सीधी राह चलाते हैं
रोज़ ही तो मैं
नाव भर कर, पीठ पे लेकर
कितने लोग हैं पार उतार कर आती हूँ ।

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रोज़ मेरे सीने पे लहरें
नाबालिग़ बच्चों के जैसे
कुछ-कुछ लिखी रहती हैं।

क्या ऐसा हो सकता है जब
कुछ भी न हो
कुछ भी नहीं…
और मैं अपनी तह से पीठ लगा के इक शब रुकी रहूँ
बस ठहरी रहूँ
और कुछ भी न हो !
जैसे कविता कह लेने के बाद पड़ी रह जाती है,
मैं पड़ी रहूँ…!

4.
नज़्म उलझी हुई है सीने में

नज़्म उलझी हुई है सीने में
मिसरे अटके हुए हैं होठों पर
उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह
लफ़्ज़ काग़ज़ पे बैठते ही नहीं

कब से बैठा हुआ हूँ मैं जानम
सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा
बस तेरा नाम ही मुकम्मल है
इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी

5.
प्यार वो बीज है

प्यार कभी इकतरफ़ा होता है; न होगा
दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये
प्यार अकेला नहीं जी सकता
जीता है तो दो लोगों में
मरता है तो दो मरते हैं

प्यार इक बहता दरिया है
झील नहीं कि जिसको किनारे बाँध के बैठे रहते हैं
सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता
बस दरिया है और बह जाता है.

दरिया जैसे चढ़ जाता है ढल जाता है
चढ़ना ढलना प्यार में वो सब होता है
पानी की आदत है उपर से नीचे की जानिब बहना
नीचे से फिर भाग के सूरत उपर उठना
बादल बन आकाश में बहना
कांपने लगता है जब तेज़ हवाएँ छेड़े
बूँद-बूँद बरस जाता है.

प्यार एक ज़िस्म के साज़ पर बजती गूँज नहीं है
न मन्दिर की आरती है न पूजा है
प्यार नफा है न लालच है
न कोई लाभ न हानि कोई
प्यार हेलान हैं न एहसान है.

न कोई जंग की जीत है ये
न ये हुनर है न ये इनाम है
न रिवाज कोई न रीत है ये
ये रहम नहीं ये दान नहीं
न बीज नहीं कोई जो बेच सकें.

खुशबू है मगर ये खुशबू की पहचान नहीं
दर्द, दिलासे, शक़, विश्वास, जुनूं,
और होशो हवास के इक अहसास के कोख से पैदा हुआ
इक रिश्ता है ये
यह सम्बन्ध है दुनियारों का,
दुरमाओं का, पहचानों का
पैदा होता है, बढ़ता है ये, बूढा होता नहीं
मिटटी में पले इक दर्द की ठंढी धूप तले
जड़ और तल की एक फसल
कटती है मगर ये फटती नहीं.

मट्टी और पानी और हवा कुछ रौशनी
और तारीकी को छोड़
जब बीज की आँख में झांकते हैं
तब पौधा गर्दन ऊँची करके
मुंह नाक नज़र दिखलाता है.

पौधे के पत्ते-पत्ते पर
कुछ प्रश्न भी है कुछ उत्तर भी
किस मिट्टी की कोख़ से हो तुम
किस मौसम ने पाला पोसा
औ’ सूरज का छिड़काव किया.

किस सिम्त गयी साखें उसकी
कुछ पत्तों के चेहरे उपर हैं
आकाश के ज़ानिब तकते हैं
कुछ लटके हुए ग़मगीन मगर
शाखों के रगों से बहते हुए
पानी से जुड़े मट्टी के तले
एक बीज से आकर पूछते हैं.

हम तुम तो नहीं
पर पूछना है तुम हमसे हो या हम तुमसे
प्यार अगर वो बीज है तो
इक प्रश्न भी है इक उत्तर भी.

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